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अंतिम अपडेट: 15 अक्टूबर 2026

Dr Harsh Shah
MS, MCh (Surgical Gastroenterology), DrNB (Surgical Gastroenterology)
Registered with Gujarat Medical Council, Reg. No. G-38738
Robotic Cancer Surgeon (GI)
Apollo Hospital, Bhat, Gandhinagar · Gota OPD, Ahmedabad · 18 साल का अनुभव
★★★★★ Google: 4.9 from 53 reviews (Gota clinic) · 5.0 from 25 reviews (Apollo, Bhat)
संक्षेप में
पहला क़दम तीन बातों से तय होता है: बड़ी आंत की कौन-सी तरफ़ रुकी है, मरीज़ कितना बीमार है, और आंत फटने की कगार पर है या नहीं।
बाईं तरफ़ रुकावट हो और मरीज़ स्थिर हो, तो अक्सर धातु के stent से रास्ता खोला जाता है। फिर एक से दो हफ़्ते में cancer का तय ऑपरेशन होता है।
इमरजेंसी के ऑपरेशन में robot नहीं लगता। आंत खुल जाए और मरीज़ संभल जाए, उसके बाद के तय ऑपरेशन में robot की भूमिका आती है।
Stent या ऑपरेशन का फ़ैसला लेने से पहले मरीज़ को स्थिर किया जाता है। फिर contrast वाला CT बताता है कि रुकावट कहाँ है और कितनी गंभीर है।
| CT में क्या दिखे | उसका मतलब |
|---|---|
| रुकावट किस जगह है। | दाईं और बाईं तरफ़ का इलाज अलग है। |
| बड़ी आंत की शुरुआत कितनी फूली है। | बहुत फूली हो तो जल्दी फट सकती है। तुरंत ऑपरेशन चाहिए। |
| आंत की दीवार मोटी। | वजह गांठ होने का इशारा। |
| पेट में खुली हवा या पानी। | आंत फट चुकी होने का इशारा। |
| लिवर, फेफड़ों या पेट की झिल्ली पर धब्बे। | Cancer फैला है या नहीं, यह बताता है। |
| गांठ की लंबाई। | लंबी गांठ में stent कम काम आता है। |
मरीज़ अस्थिर हो या आंत फटने की कगार पर हो, तो अभी ऑपरेशन। मरीज़ स्थिर हो तो stent, stoma या गांठ निकालने के बीच सोचने का समय मिलता है।
| हालत | आम पहला क़दम |
|---|---|
| Shock, फटी आंत के लक्षण, या फटने की कगार। | तुरंत ऑपरेशन। |
| दाईं बड़ी आंत रुकी। | दायाँ हिस्सा निकालकर आंत जोड़ना। स्थिर हो तो दूरबीन से, नहीं तो खुला। |
| बाईं तरफ़ रुकी, मरीज़ स्थिर और सक्षम। | धातु के stent से रास्ता खोलकर, फिर तय ऑपरेशन। |
| बाईं या नीचे की तरफ़ रुकी, बड़े ऑपरेशन की ताक़त नहीं। | अभी गांठ निकाले बिना stoma से राहत। |
| बाईं तरफ़ रुकी, मरीज़ अस्थिर। | तुरंत गांठ निकालना, आमतौर पर stoma के साथ। |
Stent धातु की जाली वाली नली है। नीचे से scope के सहारे इसे सिकुड़े हिस्से के आर-पार रखा जाता है। वहाँ यह खुलकर आंत को ख़ाली होने देता है। गांठ के ठीक नीचे स्याही का निशान लगाया जाता है, ताकि ऑपरेशन के समय surgeon उसे ढूँढ सके।
Stent तब चलता है जब रुकावट बाईं तरफ़ हो, मरीज़ स्थिर हो और गांठ बहुत लंबी न हो। Stent लगाने वाली टीम का होना ज़रूरी है। दाईं तरफ़ की रुकावट, फटी आंत, एक से ज़्यादा सिकुड़ी जगहें, या फटने की कगार हो, तो stent नहीं लगाया जाता।
शोधों में stent के बाद तय ऑपरेशन और सीधे इमरजेंसी ऑपरेशन, दोनों में लंबे समय में cancer के नतीजे बराबर रहे। Stent के बाद stoma कम बने और अस्पताल में दिन कम लगे। बिना परत वाला stent ज़्यादा पसंद किया जाता है, क्योंकि वह कम खिसकता है।
Stent के अपने जोखिम हैं। आंत में छोटा छेद होना, stent खिसकना, खून आना, या फिर से रुकावट। Stent लगाने से पहले यह सब समझाया जाता है।
बड़े ऑपरेशन की ताक़त न हो, तो पहले stoma से रुकावट हटाई जाती है। मरीज़ मज़बूत हो जाए, तब गांठ निकाली जाती है।
Stoma यानी पेट पर आंत का मुँह, जिस पर थैली लगती है। छोटे चीरे से बड़ी या छोटी आंत का फंदा बाहर लाया जाता है। नीचे stent लगाना कठिन हो, या ऑपरेशन से पहले इलाज की योजना हो, तब भी यह रास्ता लिया जाता है। ऐसे ज़्यादातर stoma बाद में आसानी से बंद हो सकते हैं।
दाईं तरफ़ रुकावट हो तो दाईं बड़ी आंत निकालकर आंत जोड़ी जाती है। बाईं तरफ़ रुकावट हो और मरीज़ सक्षम हो, तो सुरक्षित जोड़ के लिए बड़ी आंत का लंबा हिस्सा निकाला जा सकता है।
मरीज़ shock में हो या पेट में गंदगी फैली हो, तो आंत जोड़ी नहीं जाती। गांठ निकालकर ऊपर का सिरा stoma बनाकर बाहर लाया जाता है और नीचे का सिरा बंद किया जाता है। इसे Hartmann का ऑपरेशन कहते हैं। मरीज़ सक्षम हो जाए, तो आमतौर पर तीन से छह महीने बाद stoma बंद करके आंत फिर जोड़ी जाती है। कुछ मरीज़ों में यह कभी बंद नहीं होता।
इमरजेंसी का नियम सीधा है। उस मरीज़ के लिए जो सुरक्षित हो वह ऑपरेशन चुना जाता है, जो दिखने में सुघड़ हो वह नहीं।
Robot, stent या stoma के बाद के तय ऑपरेशन के लिए है। इसमें दूरबीन या खुले ऑपरेशन जितनी ही आंत और lymph nodes निकाली जाती हैं।
फूली, नाज़ुक आंत में काम करने की जगह कम होती है। इसलिए इमरजेंसी आमतौर पर खुली या दूरबीन से होती है, robot से नहीं। Stent से आंत खुलने के बाद एक से दो हफ़्ते में तय ऑपरेशन होता है। खून कम हो तो iron दिया जाता है, और लगभग एक हफ़्ते पर scan से पक्का किया जाता है कि आंत ख़ाली हो गई है।
यह तय ऑपरेशन किसी भी तय ऑपरेशन की तरह चुना जाता है: robotic, दूरबीन या खुला। गांठ की जगह के हिसाब से ऑपरेशन की बात गांठ की जगह के हिसाब से robotic ऑपरेशन पेज पर है। बाईं तरफ़ की रुकावट के बाद अक्सर बाईं बड़ी आंत का ऑपरेशन या sigmoid colectomy होती है।
Stent के लिए endoscopy और X-ray, दोनों की टीम चाहिए, जो हर अस्पताल में नहीं होती। बीमे की मंज़ूरी से भी समय बदल सकता है। Stoma की देखभाल कैसे होगी, और वह कब बंद होगा, यह पूछ लें।
नहीं। मरीज़ अस्थिर हो या आंत फटने की कगार पर हो, तब करना पड़ता है। स्थिर मरीज़ में पहले stent या stoma हो सकता है।
जिसकी रुकावट बाईं तरफ़ हो, जो स्थिर हो और जिसकी गांठ बहुत लंबी न हो। दाईं तरफ़ की रुकावट में stent नहीं लगता।
नहीं। इमरजेंसी आमतौर पर खुली या दूरबीन से होती है। बाद के तय ऑपरेशन में robot लगाया जा सकता है।
हर बार नहीं। Stent से अक्सर stoma टल जाता है। मरीज़ बहुत बीमार हो तो stoma की संभावना बढ़ती है, और वह अक्सर कुछ समय के लिए ही होता है।
आमतौर पर एक से दो हफ़्ते में, जब आंत ख़ाली हो जाए और मरीज़ मज़बूत हो जाए।
इस केंद्र में बड़ी आंत के cancer की सर्जरी की जानकारी बड़ी आंत के cancer का robotic ऑपरेशन पेज पर है। आने से पहले कुछ पूछना हो तो +91-63590-11009 पर कॉल करें।
Shah’s Gastro, Cancer & Robotic Surgery Centre, Gota, Ahmedabad
Consultation, CT और colonoscopy की रिपोर्ट देखना, दूसरी राय और नियमित जाँच।
Apollo Hospital, Bhat, Gandhinagar
भर्ती, इमरजेंसी और तय सर्जरी, robotic, दूरबीन और open, और भर्ती के दौरान देखभाल।
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