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फैटी लीवर की बीमारी से लीवर के कैंसर का खतरा: मरीजों के लिए जरूरी जानकारी

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Incidence of Hepatocellular Carcinoma in Metabolic Dysfunction-Associated Steatotic Liver Disease A Reconstructed Individual Patient Data Meta DOI 10.1016j.cgh.2025.08.03

आजकल मेटाबोलिक डिसफंक्शन-एसोसिएटेड स्टीटोटिक लीवर डिजीज [MASLD] के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। यह एक प्रकार की लीवर (यकृत) की बीमारी [Liver Disease] है जो मुख्य रूप से खराब जीवनशैली से जुड़ी है। इस समस्या के कारण मरीजों में लीवर का कैंसर [Liver Cancer] होने का जोखिम लगातार बढ़ता जा रहा है।

शोधकर्ताओं ने यह जानने की कोशिश की कि इस बीमारी से पीड़ित लोगों में समय के साथ कैंसर विकसित होने की दर क्या है। इस बड़े अध्ययन में लगभग 40 लाख लोगों के स्वास्थ्य आंकड़ों का गहराई से विश्लेषण किया गया।

कैंसर का खतरा किसे सबसे ज्यादा है?

वैज्ञानिकों ने अपनी जांच में पाया कि जिन मरीजों के लीवर में गंभीर चोट के निशान या सिकुड़न [Advanced Fibrosis] बन चुकी है, उनकी स्थिति ज्यादा नाजुक होती है। ऐसे मरीजों में लीवर का कैंसर होने की संभावना उन लोगों की तुलना में 11 गुना अधिक होती है जिनके लीवर में यह सिकुड़न नहीं है।

अस्पताल में इलाज करा रहे मरीजों के आंकड़ों से पता चला कि गंभीर फाइब्रोसिस वाले मरीजों में 10 साल के भीतर कैंसर होने का खतरा 48 प्रतिशत तक पहुंच सकता है। बिना सिकुड़न वाले मरीजों में यह खतरा बहुत कम रहता है।

आपको आगे क्या करना चाहिए?

अगर आपको पहले से लीवर (यकृत) की बीमारी है तो बिल्कुल न घबराएं। समय रहते सही कदम उठाना सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण है। अपने डॉक्टर से नियमित रूप से मिलें और अपने लीवर की स्थिति की जांच [Screening] करवाएं। शुरुआत में ही किसी भी बदलाव का पता चलने से बेहतर इलाज संभव है।

डॉक्टर की सलाह के अनुसार अपना खानपान सुधारें। नियमित व्यायाम करें और अपने वजन को नियंत्रण में रखें। यह सही निगरानी [Surveillance] आपको भविष्य में होने वाली बड़ी स्वास्थ्य समस्याओं से बचा सकती है।

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